हिन्दू धर्म में गणपति जी को जल में ही क्यों किया जाता है विसर्जित, जानें मान्यता और शुभ मुहूर्त
मित्रो इस आर्टिकल में यह जानने वाले हैं आखिर गणेश चतुर्थी के बाद गणपति विसर्जन क्यों किया जाता है
कहा यह जाता है | कि पौराणिक कथाओ के अनुसार जब वेद वेद व्यास जी गणेश जी को महाभारत की कथा सुना रहे थे और गणेश जी कथा लिख रहे थे व्यास जी कथा सुनाते - सुनाते अपनी आँखे बंद कर लेते है और गणेश जी कथा लिखते रहते है | व्यास जी दस दिन बाद जब अपनी आँखे खोलते हैं तो तब भी व्यास जी गणेश जी को लिखते हुए पाते हैं | और व्यास जी देखते है कि लिखते लिखते गणेश जी के शरीर का तापमान अधिक बढ़ गया हैं तब व्यास जी तापमान को सामान्य करने के लिए गणेश जी की जल मे डुबकी लगवा देते हैं |
तभी से इसी मान्यता के आधार पर हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी के दस दिन पश्चात अनंत चतुर्थी के दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है
दोस्तों कहा यह भी जाता है कि गणेश चतुर्थी की शुरुआत 1893 को महाराष्ट में बाल गंगाधर तिलक ने की इससे पहले यह कुछ घरों तक सीमित था
दोस्तों जब भारत में स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था भारत में जगह जगह पर अंग्रेजो के विरुद्ध क्रांति हो रही थीं |
सभी क्रांतिकारी अलग अलग क्रांति कर रहे थे तब बाल गंगाधर ने सोचा क्यू न देश में ,मिलकर क्रांति की जाये इसलिए तिलक जी ने गणेश उत्सव मनाने को कहा इस उत्सव की वजह से सभी भारतवासी और क्रांतिकारिओं को एकजुट करना था ओर मिलकर साथ एक बड़ी क्रांति करनी थी तभी से गणेश चतुर्थी उत्सव धूम धाम से मनाया जाने लगा |
दोस्तो इस आर्टिकल में बतायी गयी जानकारी का हमारे पास कोई साक्ष्य नहीं है यह जानकारी आपको लेखो के आधार पर बताई गयी है
गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के द्वारा ' भाद्रपद शुक्ल पक्ष ' की चतुर्थी तिथि 18 सितंबर दोपहर 02:09 से 19 सितंबर दोपहर 03:13 तक हैं। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर्व 19 सितंबर, मंगलवार के दिन धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 10: 49 मिनट से दोपहर 01:16 मिनट तक रहेगा |